कारक – विभक्ति kya hai

386

कारक – विभक्ति :-

1) अभितः, परितः, समय, निकषा, हा, प्रति- इन शब्दों के योग में द्वितीया विभक्ति होती है।

उदाहरण – १) आश्रम के आसपास वन है।
आश्रमम् अभितः वनम् अस्ति।
२) गाँव के सब ओर उपवन हैं।
ग्राम परितः उपवनानि सन्ति।

३) लंका के समीप सागर है।
लंकाम् समया (निकषा वा) सागर।

४) कृष्ण के अभक्त पर खेद है।
हो! कृष्णाभक्तम्।

५) वह गाँव की ओर जा रहा है।
स ग्रामम् प्रति गच्छति।

2) सहयुक्तेप्रधाने

साथ अर्थ वाले सह,साकं, सार्धम् शब्दों के योग में अप्रधान (जिसके साथ जाने वाला जाये) में तृतीया विभक्ति का प्रयोग होता है।

उदाहरण – राम लक्ष्मण के साथ वन में गये।
रामःलक्ष्मणेन सह वनम् अगच्छत्।
माता पुत्र के साथ कल आयेगी।

माता पुत्रणे साकं श्वः आगमिष्यति।
मैं भी तुम्हारे साथ जाऊँगा।
वह पुत्र के साथ जाती है।

अहमपि त्वया सार्ध यास्यामि।
सा पुत्रेण सह गच्छति।

3) येनांगविकारः

जब किसी एक अंग के विकार से अंगी (अंगो वाला व्यक्ति) का विकार सूचित हो, वहाँ पर विकृत होने वाले अंग में तृतीया विभक्ति होती है।

उदाहरण-आँख से काणा अक्ष्णा काणः (नेत्रेण
काणः)

पैर से गंजा पादेन खञ्जः
सिर से गंजा शिरसा खल्वाट
कानों से बहरा कर्णाभ्यां वधिरः।
कान से बहरा कर्णेन वधिरः।

4) नमः स्वस्ति स्वाहा स्वधालं वषट् योगाच्च

नमः, स्वस्ति, स्वाहा, स्वधा, अलम्, वषट् – इन शब्दों के योग में चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग होता है।

उदाहरण –
राम को नमस्कार रामाय नमः ।

देवों को नमस्कार देवेभ्यः नमः ।

तुम्हारा कल्याण हो स्वस्ति तुभ्यम् ।

इन्द्र के लिए स्वाहा। इन्द्रय स्वाहा।

पितरों के लिए स्वाधा पितृभ्यः स्वधा ।

दैत्यों के लिए हरि पर्याप्त हैं दैत्येभ्यः हरिः अलम्।

पहलवान के लिए पहलवान पर्याप्त हैं

मल्लो मल्लाय अलम्।

इन्द्र के लिए भेंट इन्द्रय वषट्।

गुरुजी के लिए प्रणाम गुरवे नमः।

शिवजी के लिए प्रणाम नमः शिवाय।

प्रजाओं का कल्याण हो प्रजाभ्यः स्वस्ति।

उसको नमस्कार तस्मै नमः।

श्रीगणेश के लिए नमस्कार श्रीगणेशाय नमः।

5) षष्ठी शेषे

छः कारकों के अतिरिक्त सम्बन्ध अर्थ शेष बचता है। सम्बन्ध अर्थ में षष्ठी विभक्ति होती है।

उदाहरण – राजा का पुत्र राजपुत्रः

धर्म का युद्ध धर्मयुद्ध:

समुन्द्र का तट समुद्रतटः

6) यतश्च निर्धारणम्

जहाँ बहुत में से किसी एक का निश्चय किया जाये उसमें षष्ठी अथवा सप्तमी विभक्ति होती है।

उदाहरण –

गायों में कपिला श्रेष्ठ है।

गवां गोषु वा कपिला श्रेष्ठा।

बालकों में रमेश सबसे बड़ा है।

बालकाना बालकेषु वा रमेशः ज्येष्ठः।

कन्याओं में रमा सबसे छोटी है।

कन्यानां कन्यासु वा रमा कनिष्ठा।

गायों में काली गाय बहुत दूध देती है।

गोषु कृष्णा बहुक्षीराः।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here