हिन्दी व्याकरण

क्रियाविशेषण किसे कहते है।

क्रिया से पुछने वाले क्यू,कैसे, कहा, कब, कितना जैसे प्रश्नका उत्तर आता है, उसे क्रियायोगी कहते है। क्रियाका समय, स्थान, रीति और परिमाण बताके क्रियाका विशेषता प्रकट करना शब्द क्रियायोगी है। वाक्यमे क्रियाके साथ विशेषण, क्रियाविशेषण और वाक्यका विशेषता बताना अविकारी पद क्रियायोगी है। क्रियायोगीको ही क्रियाविशेषण कहते है।
जैसे :-
क्रियाका विशेषता = सम्राट थोड़ी ही चोट
खाया।

विशेषणका विशेषता = तुम्हारा बहोत खराब

व्यवहार है।

क्रियाविशेषणका विशेषता = तुम ठिक ही नीचे
गए।

वाक्यका विशेषता = सायद मै घर जाउँगा।

वाक्यका क्रियायोगी क्रियाके आगे,विशेषणके आगे, क्रियाविशेषणके आगे और वाक्यके आगे आ सकता है।

क्रियायोगी / क्रियाविशेषण कितने प्रकार के होते है ?
ये पाँच प्रकार के होते है ।

समयवाचक क्रियायोगी :-

क्रियापदके समयको समझने वाले शब्दोको क्रियायोगी कहते है।

जैसे :- मै कल लखनऊ जाउंगा।

= सहर मे जादा अत्याचार होता है।

= हमलोग अभि मेहनत करेंगे तो आगे
चलकर भविष्य मे सुख पयेंगे।

= जब आना है तब आओ।

स्थानवाचक क्रियायोगी :-

‘कहाँ’ और ‘किधर’
प्रश्नके उत्तरमे आने वाले शब्द को क्रियायोगी/
क्रियाविशेषण कहते है। जैसे :- अन्दर,बाहर, इधर, उधर, आगे,पीछे इत्यादि।

= वो लोग पीछे गए ।
= आगे बढ़ने के लिए मेहनत करना पड़ता है।

परिमाणवाचक क्रियायोगी :-

‘कितने’ पश्नका उत्तर आना और क्रियाविशेषण तथा क्रियाविशेषणका परिमाण समझना क्रियायोगीका परिमाणवाचक क्रियाविशेषण है।
जैसे :- थोडा, सही , जादा, पूरा,
बहोत,थोड़ाबहोत, इतना,उतना ।

= वो थोड़ाबहोत खाता है।
= परीक्षा में जीतना लिख सकते हो उतना ही
लिखो ।

सहायक क्रिया 

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