विराम चिन्ह (Punctuation mark) kya hai

486

विराम चिन्ह (Punctuation mark)

भाषा के लिखने में अर्थ तथा भाव के अनुसार कुछ विराम चिन्हो को लगाना पड़ता है। इन्हें (punctuation-marks) कहते हैं। इन विराम चिन्हो के द्वारा पढ़ने वाले को यह भी पता लग जाता है कि पढ़ते समय कहाँ पर कितनी देर रुकना चाहिए। यदि कोई विराम चिन्ह छूट जाय अथवा गलत स्थान पर लग जाय तो अर्थ अस्पष्ट अथवा बिल्कुल विपरीत हो सकता है।

क) पूर्ण विराम चिन्ह (।)

नियम : इसका प्रयोग वाक्य के अन्त में होता है। जैसे- मैं रोज स्कूल जाता हूँ।

ख) अल्प विराम चिन्ह (,)

अल्प विराम का मतलब आंसिक विश्राम है। वाक्यमे एक से अधिक प्रकार का पद, पदावली, उपवाक्य को अलग संयोजक न होने के जगह, संयुक्त वाक्य मे और कथयिता अंशके पीछे अल्प विराम चिन्ह प्रयोग करते है।

जैसे-
राम, श्याम, रवि, रमा और सरिता विराटनगर गए।

रवि अत्यन्त विचारशील, गम्भीर, सक्षम और कुशल प्रशासक है।

अर्ध विराम चिन्ह ( )

अल्प विराम से जादा और पूर्ण विराम से कम विश्राम होनेपर अर्ध विराम चिन्ह प्रयोग जैसे-

मानवता नैतिकता का नाम है, बहादुरी का नाम है और विश्वासका नाम है।

अच्छा पढ़ेँ, धन कमाए, सुखी बनेँ, सबका इच्छा है।

निर्देश चिन्ह (:)

किसी विषयका निश्चित जानकारी देते वक्त निर्देश चिन्ह का प्रयोग,
जैसेः बाहुन जातिका बहोत जात होते है :
तिवारी, पौडयाल, उपाध्याय, मिश्र इत्यादि।

कोई बातका जानकारी देने के लिए सापेक्षविराम/ निर्देश चिन्ह का प्रयोग करते है,
जैसे : कोई प्रश्नका छोटा टिप्पणी लिखना :

वर्णविन्यास, शब्दरचना, शब्दरुपायन।

प्रश्नवाचक चिन्ह (?)

जिज्ञासा प्रकट करना या पूछना प्रश्नवाचक चिन्ह प्रयोग करना,
जैसे- तुमहरा नाम क्या है ?

नवीन घर कब आयेगा ?

विस्मयादिबोधक चिन्ह (!)

आश्चर्य घृणा, हर्ष, विस्मात आदि विशेष भाव समझने को विस्मयादिबोधक चिन्ह प्रयोग करना,

जस्तै :

आहा! कितना अच्छा फुल!

ओहो! कितना अच्छा गमला!

वाक्य के पीछे विस्मयादिबोधक चिन्ह रखना वाक्य ही विस्मयादिबोधक होता है।
जैसे- वो पास हो गया!

योजक चिन्ह (-)

पारस्परिक अर्थ बताने वाले समस्त या द्वित्व शब्दोंके बिच और पङ्ति के अन्त्यमे शब्द न अटने पर अलग – अलग करने को योजक चिन्ह प्रयोग करना, जैसे-

नेपाल – चीन सम्बन्ध, सङ्कटा – ठमेल भिडन्त

भारत सरकार, शिक्षा मन्त्रालय, पाठयक्रम विकास केन्द्र ने पाठय पुस्तक विकास किया।

कोष्ठक चिन्ह ( ( ) )

अर्थ स्पष्ट करने के लिए और क्रम बताने के लिए कोष्ठक चिन्ह का प्रयोग करना, जैसे-

मेंढक उभयचर ( जमिन और पानी दोनो जगह मे रहने वाला प्राणी ) है।

उध्दरण चिन्ह ( ” ” )

और किसी का कहा हुआ प्रस्ट करना, ग्रन्थ, पुस्तक, पत्र पत्रिका, पुरस्कार इत्यादि विशेष जोड दिया हुआ बताना उध्दरण प्रयोग करना,

जैसे-
ग्रन्थ, पुस्तक, पत्र पत्रिका, पुरस्कार इत्यादि एकल उध्दरण चिन्ह ‘दिव्योपदेश’, ‘मधुपर्क’
‘मदन पुरस्कार’
अ) किसी का कहा हुआ प्रस्ट करना दुवारा उध्दरण चिन्ह में :
देवकोटाने कहा, ” मेरा मुनामदन।”

कहा हुआ विशेष शब्द एकल उध्दरण चिन्ह मे :
रामने कहा, ” देवकोटाका उत्कृष्ट कृति ‘मुनामदन’ है। “

किसी शब्दको जोडना एकल उध्दरण चिन्ह :
‘बन्द’ विरोधका सही तरिका नही है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here