विशेषण (Adjective)

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विशेषण (Adjective)

किसी के प्रश्न के उत्तर में आने वाला शब्द, क्या, कितना, आदि विशेषण कहलाता है। विशेषण का अर्थ गुण, दोष, स्थिति, संख्या, प्रकृति, नाम या सर्वनाम की मात्रा से है। विशेषण विकार शब्दावली है।

उदाहरण के लिए:
पेड़ सूखा है। = कैसा है? सूखा

बड़ा बेटा चतुर है। = कौन सा बेटा? सबसे बड़ा

वृक्ष बड़ा है। = कितना है? महान

कई बसें आती हैं = कितनी? अधिक

विशेषण के प्रकार

गुणवाचक विशेषण (Adjective of Quality):-

गुणवाचक विशेषण उसे कहते है, जो कि गुण, दोष, अवस्था, रुप-रङ्ग, आकार, स्वाद, दशा, स्थान आदि कि विशेषता प्रकट करते हैं उसे गुणवाचक विशेषण कहते है।

जैसे- गुण = वह एक बहोत अच्छा आदमी है।
रंग = वो लाल रंग का टोपी लगया था।
आकार = उसका चेहरा गोल है।
अवस्था = भुखे पेट भजन नही होता।

विशेषणों मे इनकी संख्या सब से अधिक है, कुछ विशेषण इस प्रकार से है।

गुण = बुद्धिमान, भला, ईमनदार, न्यायी, सच्चा, सीधा, शान्त आदि।

रुप-रंग = काला, सफेद, धुँधला, फीका, चमकीला, बैंगुनी, सुनेहरा।

दोष = दोषी, झूठा, कठोर, घमंडी, पापी, दुष्ट आदि।

आकार = लम्बा, छोटा, बड़ा, चौकोर, ऊँचा, तिरछा, समान आदि।

स्वाद = खट्टा, मीठा, कड़वा, नमकीन सुगंधित आदि।

स्थान = भीतरी, बाहिरी, पूरबी, दिया, बाँया, क्षेत्रीय, देशीय, अमेरिकी, भारतीय, विदेशी, ग्रामीण आदि।

काल = नयाँ,पुराना, ताजा, भूत, वर्तमान, भविष्य, अगला, पिछला, आधुनिक, वार्षिक, मासिक, आदि।

संख्यावाचक विशेषण (Adjective of Quality) :-

नाम या सर्वनाम का संख्या, क्रम, आकृति आदि विशेषता बताने वाले शब्द संख्यावाचक विशेषण है।
जैसे- एक, सय, पहेला, दुसरा, दोब्बर, हजारौँ, लाखौँ, करौँड़ो आदि।

संख्यावाचक विशेषण के भेद

संख्यावाचक विशेषण के दो भेद होते है –

निश्चित संख्यावाचक विशेषण
अनिश्चत संख्यावाचक विशेषण

निश्चित संख्यावाचक विशेषण :-

निश्चित संख्यावाचक विशेषण वो कहलाते है जो कि विशेषण शब्द जो विशेष्य की निश्चित संख्या का बोध कराते है।

मेरी कक्षा में तीस छात्र हैं।
पेड़ पर दो चिड़ियाँ बैठी हैं।
प्राथना के समय सारे बच्चे उपस्थित थे।

इन सभी वाक्यों मे निश्चित संख्याका विशेष्य का बोध हो रहा है, जैसे- कक्षा मे कितने छात्र हैं ?- तीस, पेड़ पर कितनी चिड़ियाँ बैठी है? – दो, प्राथना के समय कितने बच्चे उपस्थित थे? – सारे ये सभी वाक्य संख्यावाचक विशेषण मे बोध हुये हैं।

अनिश्चत संख्यावाचक विशेषण :-

अनिश्चत संख्यावाचक विशेषण उसे कहते जो कि विशेष्य संख्या का निश्चत बोध न कराता हो।

कुछ देर बाद हम अपने घर चले जायेंगे।
आज कक्षा में बहोत कम विद्यार्थी उपस्थित थे।
कुछ समय पढकर भी अच्छा नम्बर आया।
कुछ खाना खाकर ही पेट भर गया।

इन वाक्यों में विशेष्य की निश्चित संख्या का बोध नहीं हो रहा है ?

जैसे- कितने देर बाद हम चले जायेंगे ? कुछ, कितने लोग दिखे ? कम, कितने समय पढकर पास हो गए ? कुछ, कितने फल खाकर पेट भर गया ? कुछ।

परिमाणवाचक विशेषण (Adjective of Quantity ) :-

जिन विशेषण शब्दों से किसी वस्तुका माप तौल संबंधी विशेषता का बोध होता है वे परिमाणवाचक विशेषण कहलाते हैं।

जैसे- ‘कुछ’ पानी, ‘सब’ धन, ‘तीन’ लीटर दूध, ‘तोला’ भर सोना इत्यादि। ये सभी आया हुआ परिमाणवाचक विशेषण है।

परिमाणवाचक विशेषण के भेद

परिमाणवाचक विशेषण के दो भेद होते है –

निश्चित परिमाणवाचक विशेषण :-

जो विशेषण शब्द के किसी भी वस्तु की निश्चित मात्रा अथवा माप तौल का बोध कराते हैं, वे निश्चित परिमाणवाचक विशेषण कहलाते है।

जैसे- ‘तीन सेर’ घी, ‘बारा हाथ’ जगह, ‘पाँच गज’ मकमल, ‘दश किलो’ चावल।

अनिश्चत परिमाणवाचक विशेषण :-

जो विशेषण शब्द के किसी भी वस्तु की निश्चित मात्रा अथवा माप तौल का बोध नहीं कराते है, वे परिमाणवाचक विशेषण कहलाते है।

जैसे- ‘कुछ’ दूध, ‘बहुत’ पानी, ‘सब’ धन।

संकेतवाचक या सार्वनामिक विशेषण (Demonstractive Adjective) : –

संकेतवाचक विशेषण उसे कहते जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की ओर संकेत करते है या जो शब्द सर्वनाम होते हुए किसी संज्ञा से पहले आकर उसकी विशेषता को प्रकट करें, उन्हें संकेतवाचक या सार्वनामिक विशेषण कहते है।

सरल शब्दों में – जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग संज्ञा के आगे उनके विशेषण के रुप में होता है, उन्हें सार्वनामिक विशेषण कहते हैं।

सार्वनामिक विशेषण के भेद

व्युत्पत्ति के अनुसार सार्वनामिक विशेषण के भी दो भेद है-

मौलिक सार्वनामिक विशेषण
यौगिक सार्वनामिक विशेषण

मौलिक सार्वनामिक विशेषण –

मौलिक सार्वनामिक विशेषण उसे कहते है, जो बिना रूपान्तर के संज्ञा के पहले आता हैं।

जैसे- ‘यह’ घर, ‘वह’ लड़का, ‘कोई’ नोकर इत्यादि।

यौगिक सार्वनामिक विशेषण –

यौगिक सार्वनामिक विशेषण उसे कहते है, जो मूल सर्वनामों में प्रत्यय लगाने से बनते हैं।

जैसे- ‘ऐसा’ आदमी, ‘कैसा’ घर, ‘जैसा’ देश इत्यादि।

व्यक्तिवाचक विशेषण ( Proper Adjective ) :-

व्यक्तिवाचक विशेषण उसे कहते है, जिन विशेषण शब्दों की रचना व्यक्तिवाचक संज्ञा से होती है।

जैसे- इलाहाबाद से इलाहाबादी, जयपुर से जयपुरी, बनारस से बनारसी।

उदाहरण – ‘बनारसी’ सारी बहोत अच्छी होती है।

विशेष्य या विशेषण में सम्बन्ध

इस के दो भेद है –

विशेष्य – विशेषण
विधय – विशेषण

विशेष्य विशेषण –
विशेष्य विशेषण वो है जो विशेषण विशेष्य के पहले आये, वह विशेष्य विशेषण है।

जैसे- राकेश ‘चंचल’ लड़का है। रोशनी ‘सुशील’ लड़की है।

विधय – विशेषण –
विधय विशेषण वो है जो विशेषण विशेष्य और क्रिया के बीच मे आये, वहाँ विधेय विशेषण होता है।


जैसे- मेरा कुत्ता ‘सफेद’ हैं। मेरा लड़का ‘अलसी’ है। इन वाक्यों में ‘सफेद’ और ‘असली’ ऐसे विशेषण हैं,
जो क्रमशः कुत्ता (संज्ञा) और ‘है’ (क्रिया) तथा ‘लड़का’ (संज्ञा) और ‘है’ क्रिया के बीच आये हैं।

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